अमर शहीद पं राम प्रसाद बिस्मिल की 83वी पुण्यतिथि ( 18 दिसंबर 1927 ) पर शत - शत नमन
फांसी की कोठरी में आख़िरी समय उनकी आखिरी पंक्तिया

महसूस हो रहे हैं बादे फना के झोंके ,
खुलने लगे है मुझ पर असरार जिंदगी के ,
बारे अलम उठाया रंगे निशात देखा ,
आये नहीं है यूँ ही अंदाज बेहिसी के ,
वफ़ा पर दिल को सदके जान को नज़रे ज़फा दे ,
मुहब्बत में यह लाजिम है कि जो कुछ हो फ़िदा कर दे
फांसी की कोठरी में आख़िरी समय उनकी आखिरी पंक्तिया

महसूस हो रहे हैं बादे फना के झोंके ,
खुलने लगे है मुझ पर असरार जिंदगी के ,
बारे अलम उठाया रंगे निशात देखा ,
आये नहीं है यूँ ही अंदाज बेहिसी के ,
वफ़ा पर दिल को सदके जान को नज़रे ज़फा दे ,
मुहब्बत में यह लाजिम है कि जो कुछ हो फ़िदा कर दे



